1. श्रीराम-सीता के साथ ही राम वन गमन सहित कई प्रसंगों की छवि वाले पुरातात्विक महत्व के सिक्के भेजे जाएंगे। ऐतिहासिक वस्तुओं के संग्रहकर्ता एवं वरिष्ठ इतिहासकार (मेजर) डॉ. एमके गुाा और होशंग हवलदार ने बताया कि शहर के पुरातत्वविदों और संग्रहकर्ताओं के संग्रह में सैकड़ों साल पुराने राम टका हैं।

इंदौर, युवराज गुप्ता। दक्षिण का द्वार कहे जाने वाला मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक नगर बुरहानपुर के कई संग्रहकर्ता और पुरातत्वविद अयोध्या में बनने वाले श्रीराम मंदिर के संग्रहालय के लिए अनूठी भेंट भेंजेंगे। इन लोगों के पास 200 से 400 वर्ष पुराने ‘राम टका’ हैं। श्रीराम, लक्ष्मण एवं माता जानकी की सुंदर छवि वाले सिक्कों को ‘राम टका’कहा जाता है। इनके पास दक्षिण भारत के राजाओं द्वारा श्रीराम के जीवन प्रसंगों पर बनवाए गए सिक्कों के अलावा मुगल सम्राट अकबर द्वारा बनवाए श्रीराम-सीता और लक्ष्मण के वनगमन की छवि वाले सोने के सिक्के भी मौजूद हैं। निरंजनी अखाड़े से जुड़े महंत स्वामी नर्मदानंदगिरीजी महाराज के माध्यम से ये सिक्के अयोध्या तक पहुंचाए जाएंगे। 101 पुरातात्विक महत्व के ‘राम टका’ संग्रहालय के लिए अर्पित किए जाने की योजना है। 

बहुत विशेष होता है ‘राम टका’

ऐतिहासिक वस्तुओं के संग्रहकर्ता एवं वरिष्ठ इतिहासकार (मेजर) डॉ. एमके गुाा और होशंग हवलदार ने बताया कि शहर के पुरातत्वविदों और संग्रहकर्ताओं के संग्रह में सैकड़ों साल पुराने ‘राम टका’ हैं। इनकी विशेषता यह भी है कि इनके एक ओर श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमानजी की छवि तो दूसरी ओर निर्माण का वर्ष और अन्य विशेषताएं अंकित हैं। डॉ. गुाा और हवलदार के संग्रह में राम दरबार की छवि वाले महत्वपूर्ण सिक्के सहित श्रीराम के वन गमन, सीता माता की खोज और अन्य महत्वपूर्ण प्रसंगों के दृश्यों वाले सिक्के हैं। राम दरबार वाले सिक्के में अयोध्या का नाम व छवि अंकित है। इन सिक्कों की प्राचीनकाल में पूजा होती थी और श्रद्धालु इन्हें घरों में पूजन स्थल व गल्ले (तिजोरी) में रखते थे। ये सिक्के श्रीराम जन्मभूमि न्यास को श्रीराम मंदिर से जुड़े संग्रहालय में रखने के लिए भेजे जाएंगे।

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