कोरोना वायरस (Coronavirus) के बीच 15 दिसंबर से राज्य में विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को फिर से खोलने का निर्णय लिया गया है. ऐसे में सरकार द्वारा गाइडलाइन जारी की गई है, जिसका सख्ती से पालन कराया जाएगा. 

नई दिल्ली: कोरोना वायरस (Coronavirus) के बीच उत्तर भारत के एक राज्य में 10 महीने बाद मंगलवार से राज्य के यूनिवर्सिटी और कॉलेज फिर से खोले जा रहे हैं. 15 दिसंबर से कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को खोलने का निर्णय 9 दिसंबर (बुधवार) को आयोजित राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में लिया गया था.

आरटीपीसीआर टेस्ट आवश्यक
उत्तराखंड शिक्षा विभाग के मुख्य सचिव ओम प्रकाश ने 12 दिसंबर (शनिवार) को शिक्षण संस्थानों को फिर से खोलने के लिए एसओपी गाइडलाइन जारी की. एसओपी में कहा गया है कि छात्रों को कक्षाओं में आने से पहले आरटीपीसीआर टेस्ट (RT-PCR Test) कराना होगा. कॉलेज के प्रबंधन को भी छात्रों को अपने परिसर में अनुमति देने से पहले अभिभावकों की लिखित सहमति लेनी होगी. साथ ही निर्देश दिए गए हैं कि कॉलेजों को 50 प्रतिशत क्षमता के साथ ही खोला जाएगा. पहले चरण में उन छात्र-छात्राओं को बुलाया जाएगा जिनके पास Practical subjects हैं. थ्योरी की पढ़ाई ऑनलाइन की जा सकती है.

बढ़ाने होंगे सेक्शन
आदेश में कहा गया है कि कक्षाएं केवल पहले या अंतिम सेमेस्टर के छात्रों के लिए आयोजित की जा सकती हैं. छात्रों की संख्या को नियंत्रित करने के लिए, कॉलेजों को सेक्शन की संख्या बढ़ानी होगी. अल्टरनेट डे पर ऑफलाइन कक्षाएं आयोजित की जाएंगी. साथ ही कई शिफ्ट में पढ़ाई होगी. यह भी कहा गया है कि Practical subjects विषयों के लिए र्चुअल लैब का उपयोग किया जाए.

करनी होंगी ये व्यवस्थाएं
दिशानिर्देशों में यह भी कहा गया है कि विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को खोलने से पहले उनकी ठीक से साफ सफाई करानी होगी. कॉलेज के मेन गेट पर सैनिटाइजर (Sanitiser), हैंडवाश (Handwash), थर्मल स्कैनिंग (Thermal scanning) और प्राथमिक चिकित्सा की व्यवस्था करनी होगी. प्रत्येक छात्र और कर्मचारी को मास्क पहनना चाहिए. दिशानिर्देश के अनुसार, छात्रों के बीच क्लास में छह फीट की दूरी अनिवार्य है और कॉलेज परिसर में बाहरी लोगों के आने पर प्रतिबंध लगाया जाएगा. किसी भी व्यक्ति में अगर कोरोना वायरस (Coronavirus) के लक्षण दिखते हैं तो उसे तुरंत वापस भेज दिया जाएगा.

लापरवाही पर कार्रवाई
सरकार की तरफ से निर्देश दिए गए हैं कि इन नियमों का अगर उल्लंघन होता है तो प्रिंसिपल, शिक्षकों, कर्मचारियों और छात्रों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. गाइडलाइन में यह स्पष्ट किया गया है कि अन्य राज्यों से आने वाले छात्रों और हॉस्टल में रहने वाले छात्रों को हर हाल में COVID-19 टेस्ट कराना होगा. सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि प्रिंसिपल, प्रबंधन समिति और कुलपति को ऑफलाइन पढ़ाई के संबंध में कॉलेजों और विश्वविद्यालयों की परिस्थितियों को देखते हुए अंतिम निर्णय लेने के लिए स्वंतत्रंता दी गई है. राज्य में लगभग 29 सरकारी और निजी विश्वविद्यालय हैं और कॉलेजों में छात्रों की संख्या 5 लाख से अधिक है.



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